क्यों मोदी सरकार ‘Anti demonetization Day’ मना रही है

Demonetization के एक साल

Demonetization यानी विमुद्रिकरण 8 नवंबर 2016 के बाद पिछला एक साल कैसे बिता ये कोई ढंकी छुपी बात नही रही। एक तरफ भारत के विपक्षी दल बिना किसी ठोस तर्क के इसे देश के विरुद्ध करार देते रहे। और सरकार अभय काले धन के खिलाफ संघठित कार्यवाईयाँ करती रही। सरकार एन्टी ब्लैक मनी डे मना रही है तो इसके पीछे वो सफलता है जिसकी वजह से देश की इकॉनमी सुरक्षित हुई है वहीं आने वाले कुछ वर्षों में आर्थिक न्याय का वाहक बनेगा।

सरकार के Demonetization के फैसले का स्वागत जनता ने किया। अपने लूटेरों के खिलाफ करवाई को उन्होंने ना सिर्फ स्वीकार किया बल्कि कालेधन के खिलाफ लड़ाई में शामिल भी रहे। अब आंकड़ों के बात

सरकार के मुताबिक, देश के महज 0.11 प्रतिशत लोगों ने जमा किये गए धन का 33 प्रतिशत योगदान किया मतलब देश का एक तिहाई कॅश इन्हीं लोगों के पास रहा।

17.73 लाख मामले सामने आये जिनमे आमदनी कुछ और था और बैंक में जमा की गई राशि ज्यादा निकली।

22.23 लाख खातों में जमा 3.68 लाख करोड़ रुपये संदेह के घेरे में। चल रही है जांच

बड़े नोटों में भारी कमी आयी है यह विमुद्रिकरण के पहले 18 करोड़ से हटकर 12 लाख करोड़ तक आ गई। 6 लाख करोड़ रुपये कम हुए जो अर्थव्यवस्था की सेहत के लिये रामबाण है।

आतंकवाद और नक्सली हिंसा पर गम्भीर चोट। कश्मीर में पत्थरबाजी में 75 प्रतिशत कमी आयी। हालात सुधरे।

फर्जी और हवाला कम्पनियों के टूटी कमर। 2.24 लाख कम्पनिया बन्द। जॉच और कार्यवाई जोरों से चल रही है।

टैक्स नेट का अप्रत्याशित विस्तार।

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