Hafiz saeed की वो हक़ीक़त जिससे पाकिस्तान दुनिया की आंखों में धूल झोंकता है

हाफिज सईद एक ग्लोबल टेररिस्ट है। इस साल जनवरी में जब उसे पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा करार देकर नज़रबन्द किया गया तो उसपर पाकिस्तान के एन्टी टेररिस्ट एक्ट के धाराएं लगाई थी। यही नही इस आतंकवादी और इसके संरक्षकों के हथियार भी छीन लिए गए थे। इस बीच हाफिज सईद ने कम से कम चार बार लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की और  नज़रबन्द करने का कारण पूछा और हर बार उसे पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया गया। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि उसी हाई कोर्ट जिसने पिछली चार याचिकाओं को खारिज किया था उसने उसी आतंकी जिसपर अमरीका ने 50 करोड़ का इनाम रखा है को नज़रबन्दी से रिहा कर दिया।

भारत में इस खबर के बाद आमतौर पर यही समझा गया है कि हाफिज पर मुम्बई हमला 2008 के लिए केस चलाया जा रहा है जिसमे 6 अमरीकी भी मारे गए थे। पाकिस्तानी प्रान्त पंजाब के कानूनमंत्री सनाउल्लाह राणा ने हाफिज की नज़रबन्दी के वक़्त बताया था कि वो पाकिस्तान में मुजाहिरे करता है। आतंकवाद के लिए  चंदा इकठ्ठा करता है। गैर कानूनी तौर पर हथियार रखता है। यही नही हाफिज सईद सईद पर पाकिस्तान आतंक निरोधक कानून की सबसे सख्त धारा schedule 4 के तहत चार्जशीट दायर की गई थी जिसमे अगर आरोप सिद्ध होते तो इसे फांसी या उम्रकैद की सजा  का प्रावधन इसी schedule में था।

यानी सबकुछ एक स्क्रिप्ट के अनुसार चल रहा था तभी पाकिस्तानी सेना के कान खड़े हुए और उसने हाफिज को रिहा करने के लिए नवाज़ सरकार पर दबाव बढ़ा दिया। नवाज़ सरकार और पाकिस्तान की सेना के बीच तलवार पहले ही खींची जा चुकी थी जब अक्टूबर 2016 में एक उच्चस्तरीय बैठक में नवाज़ शरीफ के भाई शाहबाज़ जो पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं ने तत्कालीन आईएसआई के चीफ पर आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगाए। शाहबाज़ ने कहा कि जब भी उनकी पुलिस आतंकवादियों को गिरफ़्तार करने की कारवाई करती है आईएसआई बीच मे टपक जाती है और कार्यवाई रुक जाती है। कहते हैं कि इस मीटिंग बाद ही पाकिस्तानी सेना और सरकार एक दूसरे के आमने सामने आ गए।

गौर करने की बात है कि सेना ने दबाव बढ़ाकर नवाज़ शरीफ को भ्रस्टाचार के आरोप में पद से हटा दिया। नवाज़ शरीफ की पार्टी की सरकार तो है लेकिन नवाज़ शरीफ सत्ता से बाहर हैं जबकि इस केस के बाद भी उनकी लोकप्रियता से सेना में घबराहट है और आनेवाले आम चुनावों में नवाज़ को शिक्तस्त देने के लिए एक ऐसे मोहरे की तलाश है जो बड़े पैमाने पर जीत ना भी हासिल करे लेकिन नवाज़ की पार्टी जिसमे एक बड़ी तादाद कट्टर आबादी का है वोट काट सके।

इसे ही देखते हुए पाकिस्तानी सेना की मदद से हाफिज सईद ने  एक नई पार्टी मिली मुस्लिम लीग पाकिस्तान बनाई है और आम चुनावों में हिस्सा लेने के लिए जुट गई है। पिछले दिनों हाफिज की पार्टी ने नवाज़ के अयोग्य करार दिए जाने के बाद खाली हुई संसदीय सीट पर चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रही।

लेकिन अब नवाज़ की पार्टी और उसकी सरकार ने इसी दाव को उल्टा खेला है। पाकिस्तानी सेना और हाफिज सईद ने नवाज़ सरकार को इस्लाम विरोधी साबित कर वोट काटने की कोशिश की तो अब उसी कट्टर जमात को खुश करने के लिए हाफिज के खिलाफ अदालत में सबूत पेश नही किया और हाफिज रिहा हो गया।

पाकिस्तान में आतंकवाद क्या रुख दिखा सकता है ज्यादातर लोग इसका अंदाजा नही लगा सकते ये इतना भयावह बन चुका है। आतंकवादियों के साथ उसके इस्तेमाल से पूरा सिस्टम खड़ा है। जिसमे पाकिस्तानी सेना, राजनीतिक पार्टियां, जिसमे भुट्टो वाली पाकिस्तान पेऑप्ल्स पार्टी, इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक इंसाफ जैसी बड़ी पार्टियां तो है ही छोटी छोटी पार्टियां और आतंकवादी समूह भी इसमे शामिल हो चुकी हैं।

सबसे बड़ी बात के अन्तराष्ट्रये दबाव में पाकिस्तान के आतंकी समूह राजनीतिक चेहरा बनकर कार्यवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं। हास्यजनक भी है कि यही कोशिश यहां हर जमात भी कर रही है ताकि पाकिस्तान को आतंकवाद से पाक साफ साबित किया जा सके लेकिन उसके लिए आतंकवाद वो दलदल है जिससे वो जितना निकलने की कोशिश करता है उतना ही धंसता जा रहा है। समय आ गया है कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित कर आगे की कार्यवाई के लिए कदम उठाया जाए।

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